📊 Automatic Stock Analysis
| Company | Symbol | Price | PE Ratio | PB Ratio | PEG Ratio | EPS | ROE | ROA | Debt/Equity | Beta | Sector | Promoter Holding | DII Holding |
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किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले फंड का चयन बहुत महत्वपूर्ण है।
Sensex पहली बार 80,000 अंक के पार,
जानें म्यूचुअल फंड में निवेश की क्या होनी चाहिए रणनीति
म्यूचुअल फंड में निवेश की रणनीति, किसी स्टॉक में सीधे निवेश करने से अलग होती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिन लॉन्ग-टर्म निवेशकों के पास अच्छी तरह से डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो हैं और जो SIP के जरिए लंबी-अवधि के लिए मंथली निवेश करते हैं, उन्हें निवेश जारी रखना चाहिए
Sensex Crosses 80000: बीएसई सेंसेक्स ने बुधवार 3
जुलाई को कारोबार के दौरान पहली बार 80,000 के पार चला गया। इससे पहले सेंसेक्स ने 11 दिसंबर 2023 को पहली बार 70,000 का आंकड़ा पार किया था। इंडेक्स को 10,000 अंकों की छलांग लगाने में महज 7 महीने का वक्त लगा। रिसर्च, टेक्निकल और डेरिवेटिव के हेड समीत चव्हाण ने कहा, "बेंचमार्क इंडेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई पर खुला, लेकिन बाद में इसमें कुछ करेक्शन आया। हालांकि, बुल्स ने मामूली रिकवरी की और पूरे कारोबार के दौरान रस्साकशी जारी रही।" NSE के निफ्टी इंडेक्स ने इस दौरान 24,300 के स्तर को पार कर नई ऊंचाई छुआ। शेयर बाजार में इस तेजी के बीच फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स, म्यूचुअल फंड निवेशकों को सावधानी बरतने और जोखिम भरे सेक्टर्स में बड़ा निवेश करने से बचने की सलाह दे रहे हैं।
SIPs के साथ बने रहें
म्यूचुअल फंड में निवेश की रणनीति, किसी स्टॉक में सीधे निवेश करने से अलग होती है। आम तौर पर बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर मुनाफावसूली करने, नए निवेश को रोकने या स्टॉक में भारी निवेश करने का लक्ष्य नहीं बनाते हैं। जिन लॉन्ग-टर्म निवेशकों के पास अच्छी तरह से डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो हैं और जो SIP के जरिए लंबी अवधि के लिए मंथली निवेश करते हैं, उन्हें निवेश जारी रखना चाहिए।
गेनिंग ग्राउंड इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के फाउंडर रवि कुमार टी वी ने कहा, "ये निवेशक समझते हैं कि शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार लंबी अवधि में ऊपर की ओर बढ़ते हैं। इंडेक्स को देखकर बार-बार रीबैलेंस करने से अधिक चिंता हो सकती है और यह लंबी अवधि में मिलने कंपाउंडिंग रिटर्न के असर को भी कम कर सकता है।"
उन्होंने कहा, "शेयर बाजार इस समय ऑलटाइम हाई पर है। ऐसे में बतौर निवेशक आप इसपर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं, यह आपके पर्सनल फाइनेंशियल गोल, जोखिम सहने की क्षमता और निवेश की अवधि आदि पर निर्भर करता है। निवेशकों को लॉन्ग टर्म तक शेयर को होल्ड करने की क्षमता को समझना चाहिए, और शेयर पर कोई भी एक्शन लेने से पहले अपने डिस्ट्रीब्यूटर्स या एडवाइजर्स से सलाह लेना चाहिए।"
कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान ने बताया कि कोविड के समय चार साल पहले सेंसेक्स करीब 26,000 के स्तर पर था। उन्होंने कहा, "यह सपने जैसा लगता है लेकिन यह सच है। इससे यह भरोसा मिलता है कि शेयर मार्केट ने लंबे समय में अच्छा प्रदर्शन किया है, हमें निवेश करते समय और उसके बाद भी धैर्य और आत्मविश्वास की जरूरत है। हमारी सलाह है कि लंबी अवधि के लक्ष्य के साथ इक्विटी मार्केट में SIP के जरिए निवेश करना जारी रखें।"
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किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले फंड का चयन बहुत महत्वपूर्ण है।

મ્યુચ્યુઅલ ફંડ્સમાં ન્યૂ ફંડ ઓફર (NFO) એ શું છે?
મ્યુચ્યુઅલ ફંડ્સની દુનિયામાં, તમે NFO જેવો શબ્દ સાંભળ્યો હશે, જેનો અર્થ ન્યૂ ફંડ ઓફર થાય છે. કોઈ નવી કંપની બજારમાં નવી પ્રોડક્ટને લોંચ કરે તેના જેવું જ આમાં વિચારો. આ કિસ્સામાં, "પ્રોડક્ટ" એ મ્યુચ્યુઅલ ફંડ સ્કીમ જેવી હોય છે, અને NFOનો અર્થ નવી સ્કીમના ઓફર કરાયેલા યુનિટ્સથી થાય છે.
“મ્યુચ્યુઅલ ફંડ્સમાં NFO એ શું છે?” એ સવાલનો જવાબ આપીએ તો સરળ ભાષામાં આપણે એવું કહી શકીએ કે, તે કોઈ પ્રવર્તમાન મ્યુચ્યુઅલ ફંડ અથવા નવા મ્યુચ્યુઅલ ફંડ દ્વારા લોંચ કરાયેલી કોઈ નવી મ્યુચ્યુઅલ ફંડ સ્કીમ છે.
તમે જ્યારે NFOમાં રોકાણ કરો છો, ત્યારે તમે આવશ્યક રીતે તમારા નાણાં મ્યુચ્યુઅલ ફંડને પૂરા પાડો છો, અને ફંડ મેનેજર તે ફંડનો ઉપયોગ સ્કીમના દર્શાવાયેલા ઉદ્દેશો અનુસાર રોકાણો કરે છે.
NFOની અવધિ દરમિયાન, રોકાણકાર ઓફર પ્રાઈસ પર આ નવી સ્કીમના યુનિટ્સ ખરીદી શકે છે, જે મુખ્યત્વે ફિક્સ્ડ રકમ પર નિર્ધારિત કરાય છે (દા.ત. રૂ. 10 પ્રતિ યુનિટ). રોકાણકાર પાસેથી એકત્ર કરાયેલા નાણાંને ભેગા કરાય છે. NFOની અવધિ પૂર્ણ થયે, મ્યુચ્યુઅલ ફંડ આ ભેગી કરેલી રકમનું સ્કીમના ઉદ્દેશો અનુસાર વિવિધ નાણાકીય સાધનોમાં રોકાણ શરૂ કરે છે. આનાથી રોકાણકારોને શરૂથી જ સ્કીમની સફરનો હિસ્સો બનવાની અનુમતિ મળે છે.
માની લો કે NFO સમયે તમે 1,00,000 રૂપિયાનું રોકાણ કરો છો ત્યારે રૂ.10 પ્રતિ યુનિટ પ્રમાણે
1,00,000÷10 = 10,000 યુનિટ તમને મળે છે.
યુનિટ ની કિંમત વધે એ મુજબ તમને તમરા રોકાણ ની વેલ્યુ વધે છે.
NFO અવધિ દરમિયાન, કે જે મૂળભૂત રીતે 15-દિવસની સબસ્ક્રીપ્શન વિન્ડો રહે છે, તેમાં રોકાણકારો નિર્ધારિત ઓફર પ્રાઈસ પર (દા.ત. રૂ. 10 પ્રતિ યુનિટ) યુનિટની ખરીદી કરે છે. ફંડ મેનેજમેન્ટે પૂરી પાડેલી પસંદગીના આધારે, રોકાણકારો કોઈ લમ્પસમ રોકાણ અથવા સિસ્ટમેટિક ઈન્વેસ્ટમેન્ટ પ્લાનમાંથી (SIP) કોઈ એકની પસંદગી કરી શકે છે.
NFO એ એવી તક છે કે જેમાં રોકાણકાર રોકાણની નવી સફર શરૂ કરી શકે છે, પરંતુ તે પહેલાં કાળજીપૂર્વક મૂલ્યાંકન કરવું એ જ ચાવી છે.
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किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले फंड का चयन बहुत महत्वपूर्ण है।
Top SBI Mutual Fund, 5 वर्षों में मिला तगड़ा रिटर्न
जो निवेशक डायरेक्ट शेयर बाजार में अपना पैसा नहीं लगाना चाहते और इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश कर अप्रत्यक्ष रुप से High Return बनाना चाहते हैं वे इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं. Mutual Funds अनेकों कंपनियों के स्टॉक्स में निवेश Invest करते हैं, ताकि अगर कोई कंपनी ख़राब परफॉर्म करें, तो अच्छी परफॉर्म करने वाली कंपनी उसकी भरपाई कर सके.
चूँकि हर तरह की जरुरतों के लिए बाजार में सैकड़ों म्यूचुअल फंड स्कीमें मौजूद है, इसमें मिलने वाली विविधता से आप अपने जोखिम को मिनिमम कर सकते हैं.
बाजार पूंजीकरण के हिसाब से SBI Mutual Fund देश की सबसे बड़ी संपत्ति प्रबंधन कंपनी है, एसबीआई फंड हॉउस के पास ढेर सारी योजनाएं हैं, जिसने निवेशकों को कमाल का एसआईपी रिटर्न दिया है.
यहाँ टॉप 5 एसबीआई म्यूचुअल फंड की जानकारी दी गयी है, साथ ही बताया गया है कि 5 साल की अवधि में प्रत्येक फंड में 10,000 रुपये से 20,000 रुपये की मासिक एसआईपी पर कितना रिटर्न मिला.
SBI PSU Mutual Fund
एसबीआई पीएसयू म्यूचुअल फंड ने 5 साल की अवधि में 41.50 फीसदी का एसआईपी रिटर्न दिया है, स्थापना के बाद से फंड का रिटर्न 13.36 फीसदी का रहा है, यह योजना कुल 3,071 करोड़ रुपये संपत्ति का प्रबंधन करती है.
इस योजना में कम से कम 500 रुपये से एसआईपी कर सकते हैं, एकमुश्त निवेश की मिनिमम राशि 5,000 रुपये है, बात करें इस फंड के बेंचमार्क की तो BSE PSU TRI के खिलाफ बेंचमार्क किया गया है.
यह फंड संपत्ति के कुल 89.91 फीसदी हिस्से का निवेश इक्विटी में करती है, जिसमे मुख्य रुप से भारतीय स्टेट बैंक, पॉवर ग्रिड कार्पोरेशन, एनटीपीसी लिमिटेड व कोल इण्डिया लिमिटेड शामिल है.
10,000 रुपये की मासिक एसआईपी से इस योजना ने 5 साल की अवधि में 16.37 लाख रुपया तैयार कर दिया, इस दौरान कुल निवेश 6 लाख रुपया रहा.
20,000 रुपये की मासिक एसआईपी से 5 साल की अवधि में 32.74 लाख रुपया तैयार हो गया, यहाँ कुल निवेश 12 लाख रुपया रहा.
SBI Infrastructure Fund Direct-Growth
इस सेक्टोरल फंड ने 5 साल की अवधि में 37.88 फीसदी सालाना एसआईपी रिटर्न दिया, स्थापना के बाद से इस फंड का रिटर्न 17.71 फीसदी सालाना रहा है, यह योजना कुल 3,088 करोड़ रुपये का प्रबंधन करती है.
इस योजना में कम से कम 500 रुपये से निवेश किया जा सकता है, एकमुश्त निवेश के लिए मिनिमम राशि 5,000 रुपये है, बात करें फंड के बेंचमार्क की तो Nifty इंस्फ्रास्ट्रक्चर टीआरआई है.
यह योजना 90.20 फीसदी संपत्ति का निवेश इक्विटी में करती है, पोर्टफोलियो में मुख्य स्टॉक रिलायंस इंडस्ट्री लिमिटेड, भारतीय एयरटेल लार्सन एन्ड ट्यूब्रो, कार्बोरेंडम यूनिवर्सल लिमिटेड है.
10,000 रुपये की मासिक एसआईपी से 5 सालों में कुल 15.07 लाख रुपया तैयार हुआ, 20,000 रुपये की मासिक एसआईपी से 5 सालों में कुल 30.13 लाख रुपया तैयार हुआ.
SBI Contra Direct Plan-Growth
एसबीआई कॉन्ट्रा फंड ने 5 साल की अवधि में 36.65 फीसदी का सालाना रिटर्न दिया है, स्थापना के बाद से इस योजना ने 18.21 फीसदी का एसआईपी रिटर्न दिया है, कुल संपत्ति प्रबंधन साइज 30,520 करोड़ रुपया है.
इस योजना में कम से 500 रुपये से एसआईपी कर सकते हैं, न्यूनतम एकमुश्त एसआईपी निवेश की राशि 5,000 रुपये है, एसबीआई कॉन्ट्रा फंड को BSE 500 TRI के खिलाफ बेंचमार्क किया गया है.
योजना के पोर्टफोलियो में 94 शेयर शामिल है, जिसमे से प्रमुख स्टॉक निफ़्टी बैंक, एचडीएफसी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, गेल इण्डिया लिमिटेड आदि है.
10,000 रुपये की मासिक एसआईपी से 5 सालों में कुल 14.64 लाख रुपया तैयार हुआ, वहीं 20,000 रुपये की मासिक एसआईपी 5 सालों में बढ़कर 29.29 लाख रुपये हो गयी.
SBI Magnum Mid Cap Direct Plan-Growth
इस मिडकैप फंड योजना ने 5 साल की अवधि में 32.53 फीसदी का एसआईपी रिटर्न दिया है, स्थापना के बाद से इस योजना का रिटर्न 21.34 फीसदी रहा है, वर्तमान में फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट 18,399 करोड़ रुपये रहा है.
इस फंड में कम से कम 500 रुपये से एसआईपी कर सकते हैं, एकमुश्त निवेश के लिए मिनिमम राशि 5000 रुपये है, यह योजना 95.93 फीसदी निवेश इक्विटी में करती है जिसमे 70.12 फीसदी निवेश केवल मिड कैप स्टॉक में होता है.
पोर्टफोलियो में 74 स्टॉक मौजूद है, जिसमे टॉरेंट पॉवर, सेफलर इण्डिया, सुंदरम फाइनेंस लिमिटेड आदि प्रमुख है.
10,000 रुपये की मासिक एसआईपी को इस योजना ने 5 सालों में 13.30 लाख रुपया बना दिया, वहीं इसी अवधि में 20,000 रुपये की मासिक एसआईपी से 26.60 लाख रुपया तैयार हुआ.
Disclaimer : यह आर्टिकल रिसर्च और जानकारियों के आधार पर बनाया गया है, हमारे द्वारा किसी भी प्रकार की फाइनेंसियल एडवाइज नहीं दी जाती अगर आप निवेश करना चाहते हैं तब सबसे पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें
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किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले फंड का चयन बहुत महत्वपूर्ण है।
